बाल विकास का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता एवं महत्व

बाल विकास का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता एवं महत्व

बाल विकास का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता एवं महत्व- आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि बाल विकास का क्या अर्थ होता है? बाल विकास की परिभाषा क्या है? तथा साथ ही साथ बाल विकास की आवश्यकता और बाल विकास का महत्व भी जानेंगे।

अगर कोई साधारण तौर पर जानना चाहे कि बाल विकास का अर्थ क्या है? या फिर बाल विकास से आप क्या समझते हैं? तो Answer होगा कि बालक के विकास को ही बाल विकास कहते हैं। आइये विस्तार से पढ़ते हैं बाल विकास को।

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बाल विकास का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता, महत्व
बाल विकास का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता, महत्व
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बाल विकास का अर्थ (Meaning of Child Development) | Bal vikas ka arth

किसी शब्द के मुख्य अर्थ को समझने से पहले उसके शाब्दिक अर्थ को समझना बहुत ज़रूरी है। इससे पता चल जाता है कि ये शब्द बना कहाँ से होगा। बाल विकास दो शब्दों से मिलकर बना है- बाल या बालक (Child) तथा विकास (Development)।

बाल का अर्थ (Meaning of Child) || Bal ka arth

बाल या बालक का तातपर्य जन्म से 12 वर्ष तक के बच्चों से लगाया जाता है। परंतु बाल विकास में बालक का अर्थ गर्भावस्था से युवावस्था या परिपक्वावस्था से लगाया जाता है।

विकास का अर्थ (Meaning of Development) || Vikas ka arth

विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका आरम्भ गर्भावस्था से होता है। और यह जीवनपर्यंत चलता रहता है। विकास कई रूपों में होता है जैसे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक आदि।

बाल विकास का अर्थ विश्लेषण करें तो निम्न तथ्यों का समावेश इसमे मिलेगा। –

● यह एक सकारात्मक विज्ञान है।

● बाल विकास गर्भवस्था से लेकर परिपक्वावस्था तक का अध्ययन है।

बाल विकास की परिभाषाएं (Definitions Of Child Development) || Bal vikas ki Paribhasha in Hindi

आइये जानते हैं बाल विकास की कुछ प्रमुख परिभाषाएं-

श्रीमती एलिजाबेथ हरलॉक के अनुसार बाल विकास की परिभाषा

आज बाल विकास में मुख्य रूप से. बालक के रूप, व्यवहार, रुचियों एवम लक्ष्यों में होने वाले उन विशिष्ट परिवर्तनों की खोज पर बल दिया जा रहा है. जो उसके विकासात्मक अवस्था से दूसरी अवस्था मे जाते समय होते हैं। इसके अतिरिक्त बाल विकास यह खोज करने का भी प्रयास करता है. कि ये परिवर्तन कब होते हैं.इसके लिए कौन से कारण उत्तरदायी हैं.और ये वैयक्तिक हैं अथवा सार्वभौमिक।

– E.B. Hurlock

क्रो एंड क्रो के अनुसार बाल विकास की परिभाषा

बाल मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो व्यक्ति के विकास का वैज्ञानिक अध्ययन गर्भकाल से किशोरावस्था तक करता है।

Child psychology is a scientific study of the individual from his parental beginning through the early to his adolescent development.

– Crow and Crow

ड्रेवर के अनुसार बाल मनोविज्ञान की परिभाषा

बाल मनोविज्ञान. मनोविज्ञान की वह शाखा है जो प्राणी के विकास का अध्ययन जन्म से परिपक्वावस्था तक करती है।

Child Psychology is a branch of psychology with studies the human being in development from birth to maturity.

– James Drever

गैरिसन एवं अन्य के अनुसार बाल विकास

बाल मनोविज्ञान का प्रत्यक्ष सम्बन्ध बाल व्यवहार से है।

Psychology is concerned with observable child behavior.

– Garrison & others.

स्किनर के अनुसार बाल विकास की परिभाषा

बाल मनोविज्ञान. बालक के व्यवहार एवं अनुभव का विज्ञान है।

Child Psychology is the science of child behavior and experience.

-Skinner.

बाल विकास के विभिन्न पहलू

बाल विकास के विभिन्न पहलू इस प्रकार हैं। –

  • शारीरिक विकास
  • गत्यात्मक विकास
  • मानसिक विकास
  • संवेगात्मक विकास
  • भाषा विकास
  • सामाजिक विकास
  • नैतिक विकास
  • चारित्रिक विकास
  • सौंदर्यात्मक विकास
  • धार्मिक विकास
  • स्मृति का विकास
  • प्रतिभा व कल्पना का विकास
  • अवधान व रुचि का विकास
  • चिंतन एवं रुचि का विकास
  • खेल विकास
  • व्यक्तित्व विकास

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बाल मनोविज्ञान या बाल विकास की आवश्यकता एवं महत्व || Bal Vikas ka mahtva – Bal Vikas ki Avshyakta

बाल विकास की आवश्यकता और महत्व को इस प्रकार से समझा जा सकता है।

शिक्षार्थी की दृष्टि से बाल विकास की आवश्यकता एवं महत्व

  • बालकों के वंशानुक्रम एवं वातावरण का अध्ययन।
  • बालकों के विकास की अवस्थाओं का अध्ययन।
  • बालक की विशिष्ट योग्यताओं का अध्ययन।
  • इसकी व्यक्तिगत भिन्नताओं का अध्ययन।
  • रुचियों, प्रेरणाओं और मूल प्रवृत्तियों का अध्ययन।
  • विशिष्ट बालकों का अध्ययन।

शिक्षक की दृष्टि से बाल विकास की आवश्यकता एवं महत्व

शिक्षक के लिए बाल विकास या बाल मनोविज्ञान की उपयोगिता को इस प्रकार से समझा जा सकता है। –

  • बाल मनोविज्ञान शिक्षक को. सम्यक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  • इससे बालक के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का ज्ञान हो जाता है।
  • कक्षा में उपयुक्त शैक्षिक वतावरण उतपन्न करने में सहायक।
  • यह अध्यापकों में छात्रों के प्रति प्रेम, सहानुभूति तथा व्यवहार को अपनाने में सहायता करता है।
  • शिक्षकों को प्रभावशाली शिक्षण विधियों की जानकारी देता है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में व्यक्तिगत विभिन्नताओं के महत्व पर बल देता है।
  • पाठ्यक्रम निर्माण में सहायता प्रदान करता है।
  • शैक्षिक तथा व्यवसायिक निर्देशन प्रदान करने में अध्यापक की मदद करता है।
  • अनुशासन बनाए रखने में मनोवैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देता है।
  • बाल मनोविज्ञान अध्यापक को बाल स्वभाव तथा व्यवहार के ज्ञान से अवगत कराता है।

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बाल विकास का अर्थ, परिभाषा एवं आवश्यकता व महत्व से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

1- “मनोविज्ञान, व्यवहार का विज्ञान है”कथन है। –

अ) विलयम जेम्स
ब) अरस्तू
स) वाटसन
द) प्लेटो

उत्तर- स) वाटसन

2- “बाल विकास का प्रत्यक्ष सम्बन्ध बाल व्यवहार से है।” कथन है-

अ) गैरिसन का
ब) कुक का
स) वुडवर्थ का
द) स्किनर का

उत्तर- गैरिसन का

3- बाल विकास के अंतर्गत निम्नलिखित आयु वर्ग है-

अ) 0-18 वर्ष
ब) 20-30 वर्ष
स) 25-35 वर्ष
द) 35 से ऊपर

उत्तर- 0-18 वर्ष

4- बाल विकास उपयोगी है-

अ) बालकों के लिए
ब) शिक्षकों के लिए
स) बालकों एवं शिक्षकों दोनों के लिए
द) उपरोक्त में से कोई नही

उत्तर- बालकों एवं शिक्षकों दोनों के लिए

5- बाल विकास का तात्पर्य है-

अ) अभिवृद्धि
ब) स्वास्थ्य
स) भार
द) क्रमिक परिवर्तन

उत्तर- क्रमिक परिवर्तन

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