शैशवावस्था की प्रमुख विशेषताएँ

इस आर्टिकल में हम शैशवावस्था की प्रमुख विशेषताएँ या शैशवावस्था की विशेषताएं बताएंगे।

शैशवावस्था जन्म से 5 या 6 वर्ष तक की अवस्था होती है। इसकी विशेषताओं को बिंदुवार बताया गया है। उनका मनन कर लें।

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शैशवावस्था की प्रमुख विशेषताएं

शैशवावस्था की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं। आइये जानते हैं क्या हैं शैशवावस्था की विशेषताएं:

शैशवावस्था की प्रमुख विशेषताएँ
शैशवावस्था की विशेषताएं

1- शारीरिक विकास की तीव्रता

शैशवावस्था में प्रथम तीन वर्ष में तेज़ी से शारीरिक विकास होता है। लंबाई व भार में भी तीव्र वृद्धि होती है।

2- अपरिपक्वता

इस अवस्था मे बौद्धिक रूप से अपरिपक्व होता है शिशु।

3- मानसिक क्षमताओं में तीव्रता

शैशवावस्था में शिशु की मानसिक क्षमताओं जैसे- ध्यान, स्मरण, कल्पना, संवेदना आदि के विकास में तीव्रता रहती है।

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4- सीखने में तीव्रता

शिशु के सीखने की गति अत्यंत तीव्र होती है।

5- दोहराने की प्रवृत्ति

इस अवस्था मे दोहराने की विशेष प्रवृत्ति होती है।

6- जिज्ञासा की प्रवृत्ति

शिशु में जिज्ञासा की प्रवृत्ति अधिक होती है। वो खिलौने तोड़ता जोड़ता रहता है और जिज्ञासा शांत करता रहता है।

7- दूसरों पर निर्भरता

शैशवावस्था में शिशु दूसरों पर निर्भर रहता है। मुख्य रूप से माँ पर आश्रित रहता है।

8- संवेगों का प्रदर्शन

रोकर, चिल्लाकर अपने संवेग क्रिया पूर्ण करता है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मुख्य रूप से भय, क्रोध, प्रेम, पीड़ा जैसे 4 संवेग होते हैं।

9- काम प्रवृत्ति

शैशवावस्था में काम प्रवृत्ति प्रबल होती है। माँ का स्तनपान, हाथ-पैर के अंगूठे चूसना आदि शिशु की काम प्रवृत्ति का सूचक है।

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10- नैतिक भावना का अभाव

इस अवस्था मे नैतिक विकास नही हो पाता है। अतः उसे सही गलत की परख नही होती है।

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शैशवावस्था की विशेषताएं

तो दोस्तों ये थीं कुछ शैशवावस्था की प्रमुख विशेषताएँ। उम्मीद ही आपको पढ़कर अच्छा लगा होगा। बाल विकास पढ़ने के लिए हमारी Child Development कैटेगरी पर जाएं।

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