[Best 8] Essay on Holi in Hindi- ये सारे होली पर निबंध ज़रूर पढ़ें

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Essay on holi in Hindi- होली पर निबंध लिखना हर विद्यार्थी की चाह होती है। क्योंकि दीपावली के बाद होली ही एक ऐसा त्यौहार है।जो धूमधाम से मनाया जाता है। HMJ आज आपको Essay on Holi in Hindi देगा। जो कि आप अपनी रुचि के अनुसार सेलेक्ट करके लिख सकेंगे।

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आपका बच्चा या आप अगर class 3rd में, class 4th में, class 5th, class 6th, class 7th, 8th, 9th, 10th, 11th, 12th में या किसी भी class में हैं या आपको निबंध प्रतियोगिता में भाग लेना है। तो आप यहाँ दिए रंगों के उत्सव होली के बारे में एक से एक बेहतरीन निबंध को अपने बच्चों को पढ़ा सकते हैं या फिर उसका उपयोग ख़ुद कर सकते हैं।

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होली पर निबंध | Essay On Holi in Hindi For Class 1st, Class 2nd, Class 3rd 4th 5th 6th 7th 8th 9th 10th | Holi Essay in Hindi

यहाँ आप 100 शब्दों का, 200 शब्दों का , 300 शब्दों का, 400, 500, 600, 700 या फिर 800 तक के शब्दों का भी होली पर निबंध (Best Essay On Holi in Hindi) पा सकते हैं। बच्चों को तो नए रचनात्मक निबन्ध मिलेंगे।

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Holi Par Nibandh | होली पर निबंध | Short Essay On Holi in hindi For Class 1st and Class 2nd | Holi Essay in Hindi | 100 Words Hindi Holi Essay | Short Paragraph on Holi in Hindi

रंगों का त्यौहार होली हमारे देश मे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। दीपावली के त्यौहार का हमारे भारतवर्ष में जितना महत्व है,उतना ही महत्व होली के त्यौहार का भी है। होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन लोग एक दूसरे के यहाँ होली मिलने जाते हैं।और गले लगाकर होली की बधाई भी देते हैं।

इस त्यौहार में अबीर,गुलाल व विभिन्न प्रकार के रंग भी खेले जाते हैं। लोग आपस मे मस्तक में अबीर लगाते हैं। घरों में विभिन्न तरह के पकवान भी बनते हैं।जैसे- पापड़, गुझिया, चिप्स आदि। लोग एक दूसरे के यहाँ जाते हैं और उनका स्वागत अबीर गुलाल और पकवानों से होता है।

यह त्योहार एक प्रमुख त्योहार है। जिसका उद्देश्य प्रेम और भाईचारे की भावना को बढ़ाना है। यह त्यौहार हमे एकता का संदेश देता है।

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होली पर निबंध | Essay on holi in hindi For Class 3rd class 4th | Holi Essay in Hindi for Kids | Holi PAR Nibandh 200 Words

प्रस्तावना

हम भारत के वासी हैं, अलग-अलग यहाँ की बोली,

देती है एकता का संदेश चाहे दीवाली हो या होली।

इस त्यौहार का महत्व दिवाली के त्यौहार की तरह ही है। ये हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इस त्यौहार को मनाये जाने के पीछे इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है।

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होली मनाये जाने के पीछे कारण

इसको मनाने के पीछे इसका ऐतिहासिक कारण है। एक हिरण्यकश्यप नामक असुर था जो ख़ुद को सुर समझता था। उसकी एक दुष्ट बहन थी जिसका नाम “होलिका” था। दोनों भाई बहन ही दुष्ट थे परंतु हिरण्यकश्यप का पुत्र भगवान का भक्त था।

यही वजह थी कि हिरण्यकश्यप उसे मरवाना चाहता था। कहा जाता है कि होलिका को वरदान प्राप्त था, कि वो आग में जल नही सकती थी। तो हिरण्यकश्यप के खुराफाती दिमाग मे विचार आया। कि वो प्रह्लाद को होलिका की गोद मे बिठाकर उसे जलवा के मरवा दे। पर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। हुआ इसके उलट और होलिका ही जल गई।

इसी कारण एक रात होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन होली खेली जाती है। लोग एक दूसरे के घर जाकर होली की बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।

होली मनाने का ढंग

हर जगह अलग प्रकार से होली मनाई जाती है कहीं फूलों से तो कहीं लठमार होली। सामान्यतः होली मनाने का एक पारंपरिक तरीका होता है और हर जगह वही तरीका इस्तेमाल होता है। जैसे अबीर लगाना या गुलाल लगाना, मिष्ठान खाना, तरह-तरह के पकवानों को बनाना आदि। और यही तरीका उत्तम है,इसमे भी रंगों को लेकर कुछ सावधानी बरती जाती है।

निष्कर्ष

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि होली एक प्यार और खुशियों का त्यौहार है इसमे बिना किसी को हानि पहुंचाए एकता का संदेश देते हुए इसे मनाया जाना चाहिए।

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प्रस्तावना

हर तरफ फैला यह समाचार है, आया होली का त्यौहार है।

रंग आपस मे लगाएंगे होली हम ही मनाएंगे, गुझिया पापड़ खाएंगे होली हम ही मनाएंगे।

होली का त्यौहार आते ही जोर शोर से इसकी तैयारी शुरू हो जाती है। महीने भर पहले से ही लोगों की घरों की रौनक बढ़ जाती है और लोग इसे हर्षोल्लास से मनाने में जुट जाते हैं।

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होली क्यों मनाते हैं?

इसके पीछे की एक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि हिरण्यकश्यप नाम का एक दुष्ट राजा था। इससे पूरी प्रजा त्रस्त थी। ये लोगों को सताता था और खुद को ईश्वर मानने लग गया था,इसकी एक होलिका नामक बहन थी कि बिल्कुल इसी की राज में चल रही थी और आतंक फैलाई हुई थी।

होलिका ने किसी प्रकार यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि आग में वह बिना जले रह सकती थी। इन दो भाई बहनों को अपने हित के आगे कुछ भी नही सूझता था।

हिरण्यकश्यप का एक बेटा था जिसका नाम प्रह्लाद था। जो कि ईश्वर विष्णु का भक्त था। ये बात हिरण्यकश्यप को रास नही आई और उसने होलिका के जरिये प्रह्लाद को जलवाना चाहा। पर भगवान तो अपने भक्तों की रक्षा ही करते हैं।

विष्णु भगवान की कृपा से प्रह्लाद को खरोंच तक नही उल्टा होलिका का दहन हो गया। तीव्र ज्वाला के मुख में होलिका समा गयी। और इसी बात की ख़ुशी में प्रजा ने इस उत्सव का आग़ाज़ किया। और “होली” नामक त्यौहार का उद्भव हुआ।

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ऐसे मनाते हैं होली

यूँ तो होली हर क्षेत्र में कुछ अपने-अपने तरीकों से मनाई जाती है फिर भी एक उभयनिष्ठ तरीका होता है जो हर जगह प्रयोग होता है और वो सम्पूर्ण देश का प्रतिनिधित्व करता है।होली मनाने के पीछे ऐतिहासिक कारण तो है ही पर इस त्यौहार से भाईचारा आदि भी बना रहता है इस वजह से ये त्यौहार सबको रास आता है।

लोग बोरी भर-भर के आलू मंगाते हैं और उससे चिप्स और पापड़ बनाते हैं। हांलाकि आजकल बाज़ार में सब सामान रेडिमिड मिल जाता है पर फिर भी घर की बात ही अलग होती है। और एक दिन पहले रात में गुझिया बनाई जाती है। जो मेहमानों को भी खिलाई जाती है। सब एक दूसरे के अबीर लगाकर गले मिलते हैं और बधाईयां देते हैं।

उपसंहार

रंगो की तरह रंग बिरंगा हम सबका मन है, होली त्यौहार सिखाता सबसे अपनापन है।

होली त्यौहार प्रेम पूर्वक मनाते हुए हमें आपसी प्रेम सौहार्द बनाये रखना चाहिए और ऐसे ही मिलजुलकर रहना चाहिए।इस त्यौहार का यही उद्देश्य है।

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होली पर निबंध 400 शब्दों में – Holi Essay in Hindi with Headings and QUOTATION, Holi Par nibandh padh lo Friends

प्रस्तावना

अपना देश सिखाता हर इंसान भाई-भाई है, देखो होली आयी है,होली आई है।

हमारे देश मे मनाये जाने वाले मुख्य त्योहारों में से एक है होली जो कि भाईचारे का भी संदेश देती है।इस त्यौहार के आने से कुछ दिन पहले ही ज्ञात हो जाता है कि होली आ रही है।

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होली की तैयारी

जब होली आने वाली होती है तो इसकी तैयारी कुछ दिनों पहले से ही शुरू हो जाती है। जैसे गोबर से उपले बनाना और उसकी माला बनाना (इसका प्रयोग होलिका दहन में होता है), आलू उबाल कर उससे पापड़ बनाना और उनको धूप में सुखाना, कच्ची आलू से चिप्स बनाना, बेसन की भुजिया बनाना, सेव, चुर्री कुर्रम आदि तलना प्रारम्भ हो जाता है। विभिन्न प्रकार के डिजाइन वाले पापड़ देखने को मिलते हैं।

रंगों का त्यौहार

होली हो और रंग का ज़िक्र न हो ये नही हो सकता। होली तो रंगों का त्यौहार ही है। इसमे लोग अबीर,गुलाल और विभिन्न रंगों का प्रयोग करते हैं।

लाल,हरे,पीले,गुलाबी,बैगनी विभिन्न तरीके के रंगों का प्रयोग किया जाता है। बहुत से लोग गोबर और कीचड़ से भी होली खेलते हैं जो कि नुकसान देह होता है।

कहीं-कहीं लट्ठमार होली भी खेली जाती है,पर इसमे किसी को चोंट भी आ सकती है तो ऐसी होली से बचना चाहिए।

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आपसी मेलजोल का त्यौहार

होली का त्यौहार आपसी मेलजोल का त्यौहार है,इस त्यौहार की खासियत है कि इससे आपसी मेलजोल और भाईचारे की भावना बनी रहती है।

इस त्यौहार में लोग सिर्फ अपने घर पर ही रहकर नहीं मनाते बल्कि एक दूजे के घर भी जाते हैं और इस त्यौहार को मनाते हैं। एक दूजे से गले मिलते हैं और अबीर गुलाल लगाते हैं।

इन चीज़ों से बचना चाहिए

बहुत से लोग मादक द्रव्यों का सेवन करके ओछी हरकतें करने लगते हैं। कभी भी ऐसे द्रव्यों का सेवन नही करना चाहिए।

त्यौहार का अर्थ हुड़दंग करके बदसलूकी और अभद्रता करना कतई नही है। अतः इन सब चीजों से दूर रहना ही उचित रहता है। और अपने मित्रों को भी इससे दूर रहने को कहना चाहिए।

उपसंहार

जब भी हम दुखों में घबराते हैं तब ये त्यौहार ही हैं जो खुशियों के साथ जीना सिखाते है ।

क्योंकि त्यौहार हमे एक सूत्र में बांधे रखते हैं इसलिए इसे खुशीपूर्वक मनाना चाहिए और आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श बनाना चाहिए।

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होली पर निबंध 500 शब्दों में | Essay on Holi in Hindi For Students | 500 words Holi essay in Hindi

प्रस्तावना

होली है आयी देखो खुशियाँ है लायी, अब खाएंगे गुझिया पापड़ बहुत हुआ दूध मलाई।

इस त्यौहार के आते ही खुशियों की बरसात प्रारम्भ हो जाती है और सब उस बरसात में भींगने के लिए तैयार रहते हैं। खुशियों का पर्व होली बसंत ऋतु के आगाज के साथ फाल्गुन मास में आता है। इसका पौराणिक,धार्मिक, ऐतिहासिक और नैतिक महत्व है।

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होली के त्यौहार का ऐतिहासिक व पौराणिक कारण- होली की कहानी

हिरण्यकश्यप की कथा किससे छिपी है,किसी से नही। उस दुष्ट पापी पुरुष ने अपने पुत्र को ही मौत के मुंह मे धकेलना चाहा था, नतीजतन बुरा चाहने वाले के साथ ही बुरा हुआ। सच्चाई की जीत हुई।

उसने अपनी बहन के जरिये अपने पुत्र प्रहलाद को मरवाना चाहा था,क्योंकि प्रहलाद भगवान विष्णु का सच्चा भक्त था। और हिरण्यकश्यप चाहता था कि सब लोग उसे ही भगवान माने,जो कि असम्भव था।

प्रहलाद की भक्ति देखकर वो हिरण्यकश्यप पागल सा हो गया था। उसने होलिका को आदेश दिया कि हे बहना तुम तो आग में जल नही सकती जाओ प्रहलाद को गोद मे लेकर जल्दी दहकती ज्वाला के मुख में झोंक आओ,उसका विनाश कर आओ।

प्रहलाद ठहरा सच्चा भक्त,उसने अपने प्रभु को याद करना शुरू किया। प्रभु ने उसकी रक्षा की और होलिका का ही विनाश कर दिया। हिरण्यकश्यप को गहरा झटका लगा। बाद में हिरण्यकश्यप का विनाश कैसे हुआ वो किसी से छिपा नही है।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होली

होली का त्यौहार बुराई बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है क्योंकि वो हिरण्यकश्यप बुरा था, वो होलिका बुरी थी पर प्रहलाद सच्चा था। उसकी अच्छाई और ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव ही उसकी रक्षा किया था।

होली पूर्व संध्या में होलिका दहन कार्यक्रम

जिस दिन होली खेली जाती है और उल्लासपूर्ण मनाई जाती है,उसके ठीक एक दिन पहले होलिका दहन का कार्यक्रम होता है।

होलिका का दहन करने के लिए सूखी घास फूस,भूंसा, चारा, वृक्ष की टहनियां, पत्तियां,लकड़ियाँ आदि इकट्ठा करके उसे एक जगह पर रखकर होलिका के प्रतीक के रूप में भस्म कर देते हैं। जो याद दिलाता है कि इस दिन उस दुष्ट शैतान होलिका का दहन हुआ था।

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बच्चों और बड़ो द्वारा रंग खेलना व अबीर गुलाल लगाना

छोटे-छोटे बच्चे विभिन्न प्रकार की आकर्षक रंग बिरंगी डिजाइन वाली पिचकारी लेते हैं। जिसमे रंग भरकर दूसरों के ऊपर धार बनाते हुए छोड़ते हैं। यह दृश्य अपने आप मे एक मनोरम दृश्य रहता है।

बड़े लोग अबीर और गुलाल लगाते हैं जिसमे अभ्रक मिला रहने की वजह से वो चमकती भी है। कुछ लोग एक दूसरे के गालों में रंग मल देते हैं और फिर दोपहर पश्चात साबुन व तेल से छुड़ाते हैं।

नमकीन और मीठे पकवान

होली के दिन के लिए ही मीठे में गुझिया, बेसन के लड्डू, कालजाम या रसगुल्ला जैसी मिठाईयां बनती हैं और पापड़,चिप्स,बेसन की भुजिया,चुर्री,कुर्रम जैसी नमकीन चीज़ें भी बनती हैं।

घर के सभी सदस्य आपसी सहयोग से बनाते हैं। जो कि कई दिनों तक खाया जाता है व मेहमानों को भी खिलाया जाता है।

कुछ बुराइयां

बहुत से लोग होली जैसे पावन पर्व के बहाने अपना निजी स्वार्थ साधते हैं और शराब, भांग जैसे नशीले पदार्थ पीकर उसे उत्सव मनाने का चोला पहना देते हैं और भद्दी हरकते करते हैं जो कि एक बुराई है होली की।

उपसंहार

माना व्यापार ज़रूरी है पर प्यार का न धंधा करें, खुशियों का पर्व है होली इसे न गन्दा करें।

होली जैसे पावन पर्व को उत्साह के साथ अच्छे मन से मनाना चाहिए। इस दिन किसी को हानि नही पहुंचाना चाहिए न ही मादक द्रव्यों का प्रयोग करके हुल्लड़बाजी करना चाहिए।

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होली पर निबंध 600 शब्दों में (Essay on Holi in Hindi in 600 words) | Holi Par Nibandh

प्रस्तावना

होली आयी है गाएंगे हम खुशियों का गीत, एक बार फिर से होगी बुराई पर अच्छाई की जीत।

भारत देश त्योहारों का देश माना जाता हैं। यहां पर हर त्यौहार बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता हैं उन्हीं त्योहारों में से एक है “होली” जिसे रंगों के त्योहार के रूप में हम जानते है। लोग इसको दो रूपो में मनाते हैं एक मे हम अपनी बुराइयों को जलाते है और दूसरे में हम रंगों के रंग एक दूसरे एक साथ खुशियों को साझा करते है ।

यह पर्व हर वर्ग के लोगो के बीच खासा लोकप्रिय माना जाता हैं। इसे सभी लोग बड़े हर्ष के साथ मनाते है वो चाहे बूढ़े हो या बच्चें हो। बच्चे इसमें पिचकरिया और गुब्बारों में रंग भर कर इसे बड़ी खुशी के साथ मनाते है ।

यह त्योहार फाल्गुन मास को मनाया जाता हैं, जब वसन्त ऋतु प्रवेश करती हैं और उस समय प्रकृति का विहंगम दृश्य देखने लायक होता हैं तब हम इस त्योहार को मनाते है ।

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होली क्यों मनाते है ?

होली मनाने के पीछे बहुत सारी पौराणिक कथाएं हैं जिनमे से एक प्रहलाद और हिरणकश्यप की कहानी हैं। हिरणकश्यप नाम का एक राजा होता हैं और उसके पुत्र का नाम प्रहलाद होता है।

प्रहलाद भगवान विष्णु का उपासक होता है,और हिरणकश्यप दुष्ट राजा होता हैं,जिस वजह स वह अपने आप को ही सर्वशक्तिमान मानता था। वह चाहता था कि राज्य के सभी लोग उसकी ही पूजा करे । उसका पुत्र प्रहलाद उसकी इस बात को ना माना और वह भगवान विष्णु की ही पूजा करता था।

जिस से हिरणकश्यप को गुस्सा आया और उसने उसको कई बार दंड दिया फिर भी हिरणकश्यप की बात प्रहलाद न माना तो उसने उसे मारने की योजना बनाई

हिरणकश्यप की बहन होलिका को वरदान था कि उसे आग नही जला सकती।उसको भगवान की तरह से एक चद्दर वरदान में मिला था जिसे ओढ़ने पर उसे अग्नि नही जला पाती थी।

योजना के मुताबित होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि पर बैठी और उसी बीच तेजी से हवा चलने लगी जिस से वह चद्दर प्रहलाद पे जा गिरा और प्रहलाद तो बच गया और होलिका जरूर उस अग्नि में जल गई।

इस प्रकार से अच्छाई की बुराई पे जीत पे भारतवर्ष के सभी लोग इस त्योहार को बड़े हर्ष के साथ मनाते है ।

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होली कैसे मनाते है ? | How to celebrate holi festival

भारतवर्ष में विभिन्न जगहों में विभिन्न तरीकों से होली मनाई जाती हैं। सभी लोगो को अलग अलग तरीका होता हैं।होली मनाने का जिसमें में बरसाने में लट्ठमार होली खेलते हैं जो शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती हैं, जिसमे गोपियां बरसाने के लड़कों के पीछे लट्ठ लेकर दौड़ती हैं।

वृंदावन मंदिर में फूलों की होली खेली जाती हैं । तथा बाके विहारी में रंगों की होली खेली जाती हैं और समूचा उत्तर भारत इसे रंगों की होली के रूप मे मनाता हैं, जिसमे बच्चे बड़े उत्सुक रहते है जो पिचकारियां तथा गुब्बरो से दुसरो में रंग फेंकते है।

कुछ लोग हांडी को लटका कर उसमें दूध और भांग मिलाकर भरते हैं। उसके बाद एक के ऊपर एक लोग चढ़कर मटकी को तोड़ते हैं सभी लोग इस दिन खूब सारे पकवान बनाते है तथा एक दूसरे के घर जाकर खुशियों को साझा करते हैं ।

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निष्कर्ष

होली का त्यौहार खुशियों का त्यौहार है, ऐसा मौका आता हर साल हर बार है।

ये त्यौहार रंगों के त्योहार के साथ साथ हमे एक मौका देता हैं एक दूसरे के साथ गीले शिकवे दूर करने का । जिसके माध्यम से हम किसी से भी अपनी नाराजगी को रंग लेकर दूर कर सकते है। लोग नए नए पकवान बनाता हैं और लोग एक दूसरे के घर जाते है, जिस से अपनत्व की भावना जागृत होती हैं।

और रंगों की होली मनाने से पहले एक दिन होलिका दहन होता हैं ।जिसमे लोग अपनी बुराइयों को जला देते हैं और एक नए जीवन की शुरुवात करते है । आने वाले समय मे लोग काफी व्यस्त हो जायेगे जिस से ये त्योहार ही एक माध्यम होगा,जिसके द्वारा हम एक दूसरे से मिल पाएगे इसीलिए हम सभी को इन त्योहारों को बड़े हर्ष के साथ मानाना चाहिए और एक दूसरो के साथ खुशियों को साझा करना चाहिए ।

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होली पर निबंध 700 शब्दों में | Essay on Holi in Hindi in 700 words | Holi Par nibandh Vistar se

प्रस्तावना

देखो होली है आयी,संग खुशियां है लायी। मैंने तो पापड़ खाया,क्या तुमने गुझिया खाई।।

होली रंगों का त्योहार हैं ।और साथ-साथ इसमें हम अपने अंदर की बुराइयों को भी जलाते है। और एक प्रकार से हम एक नए जीवन की एक नए जोश के साथ शुरुवात करते है।

इस त्योहार में हम अपने गिले शिकवे दूर कर बड़े हर्ष के साथ हम इस त्योहार को मनाते हैं। होली में बहुत सारे पकवान बना कर हम लोगो को अपने घर मे आमंत्रित करते हैं। और उनको साथ हम अपनी खुशियों को साझा करते हैं।

इस व्यस्तम जीवन मे हम त्योहारों के माध्यम से ही एक दूसरे के साथ कुछ समय बिता पाते हैं। होली एक ऐसा त्योहार हैं जिसका हम साल भर इंतेजार करते हैं, और जब यह फाल्गुन मास को आता हैं तो बड़ी खुशियों के साथ मनाते हैं।

लोग इसमें गुजिया भी बनाते है उसके अंदर जो मिठास होती हैं उसके माध्यम से हम एक दूसरे में मधुर संबंध बना पाते हैं। रंगों के एक दिन पहले होलिका दहन होता हैं, जिसमे लोग उपले लकड़ियों का ढेर इक्कट्ठा कर उसे जलाते है और उसके चारों ओर घूमते हैं ।

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होलिका और प्रहलाद की कथा | होली की कहानी जिस कारण यह त्योहार आया

हिन्दू धर्म मे हर चीज को मनाने के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य रहता है। होली का भी कारण हैं मनाने का, जिसमे एक कथा प्रचलित हैं कि एक राजा प्राचीन काल में था।उसको वरदान प्राप्त था कि उसे न कोई इंसान मार सकता हैं,ना जानवर । न आकाश में मरेगा ना पाताल में । न घर के अंदर मर सकता हैं ना बाहर ।

इस वरदान के चलते वह अपने आप को ही भगवान मानता था तथा सभी लोगो से अपनी आराधना करने को कहता था । लोग डर के मारे पूजा भी उसकी करते थे। पर उसी राज्य में एक बालक था प्रहलाद जो उसकी पूजा नही करता था।

प्रहलाद हिरणकश्यप का पुत्र ही था। वो भगवान विष्णु की पूजा करता था। हिरणकश्यप इन बात से बहुत क्रोधित होता था कि इतना कहने के बाद भी वह उसकी बात नही मानता । धीरे धीरे समय बीतता गया हिरणकश्यप ने अनेक प्रयास किये की वह उसकी ही उपासना करने लगे पर ऐसा नही हुआ।

इन सब प्रयासों के विफल होने पे उसने अपनी बहन होलिका का सहारा लिया। होलिका को वरदान रूप में एक चद्दर प्राप्त थी जिस से आग भी उसका बाल भी बाका नही कर पाती थी।

इस बात का फायदा उठा कर हिरणकश्यप ने एक योजना बनाई योजना के मुताबित होलिका को प्रहलाद को अपनी गोद मे बिठा कर अग्नि में बैठना था और जिस से प्रहलाद की जल कर मृत्यु हो जाती।

पर ऐसा नही हुआ ईश्वर की कृपा से एक चमत्कार हुआ, और प्रहलाद सकुशल बच गया और होलिका उसी अग्नि में जलकर तड़प-तड़प कर मर गयी। इस प्रकार से सत्य की असत्य पर जीत हुई और लोग अच्छाई की बुराई पर जीत के रूप में होलिकोत्सव बड़े हर्ष के साथ मनाते है।

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निष्कर्ष

केमिकल युक्त रंग की जगह अबीर गुलाल लगा लो, मीठा नमकीन खाकर अपनी होली मना लो।

आजकल हम समाज मे हम यह देखते हैं कि केमिकल युक्त रंग बहुत प्रचलन में हैं, जो कि हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुचाते हैं।

इसलिए हो सके तो हमे ऐसे रंगों को प्रयोग करे कि दूसरों को नुकसान न पहुचे और हमे सादगी के साथ इस त्योहार को मनाना चाहिए। अपने बड़े बुजुर्गों से मिलना चाहिए इसी बहाने तथा हमे उनसे इसके महत्व को जानना चाहिए ।

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प्रस्तावना

खुशियों का मौका फिर आया इस बार है, देखो फिर से आया होली का त्यौहार है।

इस त्यौहार के आते ही चहुँओर रौनक बढ़ सी जाती है, होली की तैयारी बहुत ही मन से और हर्षोल्लास से की जाती है। होली के त्यौहार के पीछे की कहानी और इसके मनाने का तरीका दोनों ही अदभुत हैं। इसकी पृष्ठभूमि ऐसी होने की वजह से इस त्यौहार में चार चांद लग जाता है।

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होली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐसा पावन त्यौहार मनाये जाने के पीछे इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। इसमे 3 प्रमुख किरदार हैं एक का नाम हिरण्यकश्यप है एक का नाम प्रहलाद है और एक होलिका है। हर किरदार का अपना महत्व है पर जैसे किसी फ़िल्म में एक हीरो होता है और एक या उससे अधिक विलन होते हैं ठीक वैसे ही इस कहानी में या यूँ कहें इस ऐतिहासिक कहानी में हिरण्यकश्यप और होलिका विलन हैं और प्रहलाद हीरो है।

क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु का सच्चा भक्त था इस वजह से हिरण्यकश्यप उससे नफरत करता था। प्रहलाद हिरण्यकश्यप को फूटी आंखों नही सुहाता था। क्योंकि हिरण्यकश्यप ख़ुद को भगवान मानता था और प्रहलाद उसकी भक्ति न करके अन्य किसी की भक्ति कर रहा था जो कि उसे गंवारा न हुआ। और उसने अपनी बहन होलिका को कहा कि बहन तुम्हे तो आग में न जलने का वरदान प्राप्त है न तो क्यों न तुम मेरे पुत्र प्रहलाद को आग में जला दो।

होलिका ने वैसा ही किया और प्रहलाद को अपने गोद मे लेकर बैठ गयी आग में। भगवान का सच्चा भक्त होने की वजह से प्रहलाद को तो कुछ नही हुआ पर होलिका जलकर भस्म हो गयी। एक बार फिर अच्छाई की जीत हुई,एक बार फिर सच्चाई की जीत हुई।

इस ऐतिहासिक कहानी से कुछ सीख मिली जो कि निम्न हैं-

  • कभी किसी का बुरा या अहित नही सोचना चाहिए।
  • सच परेशान हो सकता है पर अंत मे जीत सच की होती है।
  • ईश्वरीय भक्ति का अपना अलग ही महत्व होता है,बहुत से काम सच्ची आस्था के बल पर ही हो जाते हैं।
  • कभी अपनी शक्तियों पर घमण्ड नही करना चाहिए। होलिका और हिरण्यकश्यप दोनों को ख़ुद पे घमण्ड था और परिणाम पता ही है सबको।

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होलिका दहन कार्यक्रम

एक खुला स्थान देखकर, जहाँ बिजली के तार न हों और आसपास नुकसान होने वाली चीज़ें न हों वहाँ पर विभिन्न प्रकार की घास फूस और सूखी पत्तियां और पेड़ की सूखी टहनियां आदि आग से जलने वाली सामग्री अधिक मात्रा में भंडारित की जाती हैं।

यह काम 15 दिन या एक महीने पहले से प्रारंभ हो जाता है और जगह-जगह हर मुहल्ले में होता है। और इसके लिए बहुत से लोग चंदा भी इकट्ठा करते हैं जो ये काम करते हैं। और आपसी सहयोग से होलिका दहन सम्पन्न होता है जिसे बहुत से लोग छोटी होली की भी संज्ञा देते हैं।

होलिका दहन के बाद प्रसाद बांटा जाता है और अबीर गुलाल लगाया जाता है। और इसी में बहुत से लोग उपलों की बनी माला आपस मे बदलते हैं और जो पिछली बार बदली गयी थी उसे आग में झोंक देते हैं। और थोड़ी सी आग घर पे ले आते हैं जिससे बाकी सदस्य जो नही शामिल हो पाए होलिका दहन में वो भी हो सकें। इस प्रकार यह कार्यक्रम सम्पन्न होता है।

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रंगों का खेलना और ठंडाई का सेवन

होलिका दहन के अगले दिन बच्चे बड़े सभी मिलकर रंग खेलते हैं और ठंडाई भी पीते हैं। लोगों के घर मे गुझिया पापड़ चिप्स आदि बनती हैं वो भी खाया जाता है। और स्वादिष्ट पकवान भी बनते हैं। सब लोग एक दूसरे के घर भी होली मिलने जाते हैं और उनका स्वागत होता है।

कुछ दोष

इस त्यौहार की जहाँ ढेरों अच्छाइयां हैं वहीं कुछ दोष भी हैं जो निम्नलिखित हैं-

  • बहुत से पुरुष अपने मित्र की पत्नियों को रंग लगा देते हैं जिससे कभी-कभी लड़ाई झगड़े या आपसी मन मुटाव हो जाता है।
  • ठंडाई के नाम पर भांग जैसे नशीले पदार्थ लोग पीकर नशे में ओछी हरकते कर देते हैं। बाद में शर्मिंदगी होती है।
  • कुछ लोग जिन्हें रंग नही पसन्द उनके साथ अन्य लोग जबर्दस्ती करके रंग लगा देते हैं जो कि एक गलत बात है।
  • बहुत से लोग हानिकारक रंगों का इस्तेमाल करते हैं जिससे त्वचा ख़राब हो जाती है और वो जानबूझकर इसका प्रयोग करते हैं,यह भी एक दोष है इस त्यौहार का।
  • छोटे बच्चे खेल-खेल में रंग की जगह पिचकारियों को एक दूसरे को ऊपर फेंकने लग जाते हैं। जिससे शारीरिक क्षति भी हो जाती है। चोंट भी लग जाती है।

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उपसंहार

खुशियों का त्यौहार है होली,याद करो इसके पीछे का कारण। क्यों दिखाते हो नशा करके अभद्रता,अब तो कर लो अच्छाई धारण।।

होली के त्यौहार को प्रसन्नतापूर्वक अच्छे ढंग से मनाना चाहिए। और कोई भी ऐसी हरकत नही करना चाहिए जिससे इस त्यौहार पर लांछन लगे। त्यौहारों का उद्देश्य होता है खुशियां लाना,आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ाना न कि दुश्मनी और लड़ाई-झगड़े करवाना। त्यौहार को बदनाम न करें,अपनी स्वार्थ सिद्धि न करें।

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Final Words-

दोस्तों आप विश्वास नही करेंगे पर हमें ये Holi Essay in hindi, होली पर निबंध लिखने में 4 से 5 दिन लगे। क्योंकि ये होली एस्से unique लिखना था। वरना और वेबसाइट और इस वेबसाइट के एस्से में क्या अंतर रह जाता।

Short Paragraph on holi in Hindi लिखने में उतना टाइम नही लगता जितना इस पूरे निबंध में लगा। बस आप शेयर कर दोगे तो हमारी मेहनत सार्थक हो जाएगी। ऐसे ही प्यार बनाये रखियेगा।

[Words count – 6279]

2 COMMENTS

  1. प्रखर जी आप ने अच्छा लेख लिखा है आशा करता हु कि आप ऐसे ही अच्छे लेख लिखते रहेंगे, मेरी शुभकामनाये आप के साथ है.

    • नरेंद्र जी आपका ह्रदय से आभार, सच कहूं तो मुझे लग ही नही रहा था कि इसे भी जल्दी कोई देखेगा। फिर भी मेहनत करके लिखा, सोचा शायद कोई पढ़े। आपने पढ़ा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद 😊 लिखते रहेंगे हम ऐसे ही..बस मनोबल बढ़ाते रहिये।

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