Best No. 1 Notes चिंतन का अर्थ एवं परिभाषा, चिंतन के प्रकार और सोपान

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मनुष्य स्वभाव से ही चिंतनशील होता है। यह चिंतन शक्ति ही मनुष्य को समस्त प्राणियों में उच्च स्थान प्रदान करती है। चिंतन शक्ति प्रकृति द्वारा प्राप्त होती है। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से चिंतन एक ऐसी मानसिक क्रिया है जिसमे कल्पना, स्मृति, तर्क, ध्यान, संवेदना आदि का समावेश होता है।

आइये पढ़ते हैं चिंतन के बारे में।

चिंतन का अर्थ एवं परिभाषा, चिंतन के प्रकार, चिंतन के सोपान व विशेषताएँ

तो चिंतन का क्रम कुछ ऐसे होगा। पहले आपको चिंतन का अर्थ एवं परिभाषा बताई जाएगी। फिर चिंतन के प्रकार बताए जाएंगे और फिर चिंतन की विशेषताएं और चिंतन के सोपान

चिंतन का अर्थ (Meaning of Thinking in hindi)

मनुष्य के सामने जब कोई समस्या आती है तब वह समस्या के समाधान के लिए उपाय सोचने लगता है। वह इस बात पर विचार करना प्रारंभ कर देता है कि समस्या का किस प्रकार समाधान किया जाए? इस प्रकार चिंतन प्रक्रिया आरंभ हो जाती है और समस्या का समाधान होते ही यह प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।

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अतः चिंतन विचार करने की वह मानसिक प्रक्रिया है जो किसी समस्या के साथ आरंभ होती है और उसके अंत तक चलती रहती है

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चिंतन की परिभाषाएं (Definition of thinking in Hindi)

चिंतन के अर्थ को विभिन्न मनोवैज्ञानिकों द्वारा दी गयी परिभाषाओं के आधार पर और अधिक स्पष्ट किया जा सकता है। तो आइए पढ़ते हैं चिंतन की परिभाषाएं

रॉस के अनुसार चिंतन की परिभाषा

चिंतन मानसिक क्रिया का ज्ञानात्मक पहलू है।

(Thinking is mental activity in the cognitive aspect.)

वैलेंटाइन के अनुसार चिंतन की परिभाषा

चिंतन शब्द का प्रयोग उसकी या के लिए किया जाता है जिसमें श्रृंखलाबद्ध विचार किसी लक्ष्य उद्देश्य की ओर अविराम गति से प्रवाहित होते हैं।

(It is well to keep the term, ‘thinking’ for an activity which consists essentially of a connected flow of ideas which are directed towards some end of purpose.)

चिंतन के प्रकार (Types of thinking)

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चिंतन 4 प्रकार का होता है। चिंतन के प्रकार निम्नलिखित हैं-

  1. प्रत्यक्षात्मक चिंतन (Perceptual Thinking)
  2. कल्पनात्मक चिंतन (Imaginative Thinking)
  3. प्रत्ययात्मक चिंतन (Conceptual Thinking)
  4. तार्किक चिंतन (Logical Thinking)
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चिंतन के प्रकार के बाद आइये जानते हैं चिंतन के तत्व-

चिंतन के तत्व (Factors of thinking)

वुडवर्थ ने चिंतन के पांच तत्व बताएं जो कि निम्नलिखित हैं-

  1. लक्ष्य की ओर उन्मुख होना
  2. लक्ष्य प्राप्ति के लिए इधर-उधर रास्ता ढूंढना
  3. अनुभवों का पुनः स्मरण करना
  4. अनुभवों को नवीन नमूने में संयोजित करना
  5. आंतरिक वाक गतियां एवं मुद्राएं

चिंतन की विशेषताएं (Characteristics of Thinking)

चिंतन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  1. चिंतन मानव का एक विशिष्ट गुण है ।
  2. चिंतन एक मानसिक प्रक्रिया है ।
  3. चिंतन किसी वर्तमान या भावी आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए एक प्रकार का व्यवहार है।
  4. चिंतन के दौरान किसी भी समस्या का समाधान खोजने का प्रयत्न करते हैं।
  5. चिंतन किसी भी व्यक्ति की सहायता करने के लिए हमें समाधान प्रस्तुत करती है।
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चिंतन के सोपान (Steps of Thinking)

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चिंतन के सोपान इस प्रकार हैं-

  1. समस्या का आकलन(Appreciation of problem)
  2. सम्बन्धित तथ्यों का संकलन(Collection of data)
  3. निष्कर्ष पर पहुचना(Driving at conclusion)
  4. निष्कर्ष का परीक्षण(Testing of conclusion)

तो दोस्तों आपने सीखा – चिंतन कौशल के प्रकार, चिंतन का महत्व, चिंतन के साधन, चिंतन कितने प्रकार के होते हैं, आलोचनात्मक चिंतन का महत्व, चिंतन स्तर का शिक्षण, तार्किक चिंतन क्या है, चिंतन किसे कहते है. चिंतन के सोपान,चिंतन का अर्थ एवं परिभाषा।

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