वृद्धि और विकास में अंतर

वृद्धि और विकास में अंतर- दो अलग-अलग शब्द हैं। पर अक्सर लोग धोखा खा जाते हैं और दोनों को एक सा समझ लेते हैं।इसी बात का फायदा उठाया जाता है और Exam में इससे प्रश्न रख दिया जाता है। तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम वृद्धि और विकास में सारे मुख्य अंतर जानेंगे। वृद्धि से आप क्या समझते हैं व वृद्धि और विकास की अवधारणा जानेंगे।

अगर किसी ने आपसे कहा कि वृद्धि और विकास में अंतर स्पष्ट कीजिए या बताइये तो आपको घबराने की ज़रूरत नही है। इसको एक पंक्ति में आप ऐसे समझ सकते हैं कि वृद्धि केवल शारीरिक होती है जबकि विकास सम्पूर्ण होता है, ताउम्र होता है। वृद्धि विकास का सिर्फ एक छोटा हिस्सा मात्र है।

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वृद्धि और विकास में अंतर

वृद्धि और विकास में कुछ प्रमुख अंतर हैं जो इस प्रकार हैं-

1- वृद्धि और विकास में अंतर की कड़ी में पहला अंतर तो यही है कि वृद्धि या अभिवृद्धि सिर्फ शारीरिक होती है जबकि विकास शाररिक, मानसिक, चारित्रिक, सामाजिक आदि होता है।

2- क्षेत्र- वृद्धि का क्षेत्र संकुचित होता है जबकि विकास का क्षेत्र व्यापक होता है।

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3- वृद्धि परिमाणात्मक होती है जबकि विकास गुणात्मक होता है।

4- वृद्धि एक समय के बाद रुक जाती है जबकि विकास जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है।

5- वृद्धि और विकास की निरन्तरता ( continuity of growth and development ) वृद्धि लगातार नहीं चलती बल्कि शिशुकाल में तीव्र गति से और उसके बाद धीमी हो जाती है। लेकिन विकास की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। वह रूकती नहीं है ।

तो दोस्तों ये थे 5 प्रमुख अंतर। आप इतना अच्छे से याद कर लें, समझ लें आपको बहुत मदद मिलेगी। आप अपने दोस्तों की भी हेल्प कर सकते हैं उनसे इस आर्टिकल को शेयर करके। इसके लिए आपको शेयर बटन में जाकर शेयर करना होगा।

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