शिक्षण का अर्थ और परिभाषा एवं विशेषताएं

शिक्षण का अर्थ और परिभाषा एवं विशेषताएं- शिक्षण एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा छात्रों का सीखना सरल हो जाता है। दोस्तों आज HMJ आपको शिक्षण का अर्थ और परिभाषा, शिक्षण की विशेषताएं, शिक्षण के प्रकार व शिक्षण के उद्देश्य बताएगा।

शिक्षण का अर्थ और परिभाषा एवं विशेषताएं

सबसे पहले जान लेते हैं कि शिक्षण का अर्थ क्या है? शिक्षण के अर्थ की बात की जाए तो शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है। इस पर प्रत्येक देश की शासन प्रणाली,समाजिक दर्शन, सामाजिक परिस्थितियों एवं मूल्यों आदि का प्रभाव पड़ता है। जिस देश में जैसी शासन प्रणाली या सामाजिक एवं दार्शनिक परिस्थितियां होंगी, वहां उसी प्रकार की शिक्षण प्रणाली होगी।

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शिक्षण शब्द अंग्रेजी के टीचिंग वर्ड का हिंदी पर्याय है।

शिक्षण के अंग या चर

शिक्षण के अंगों की बात की जाए तो इसमें शिक्षक शिक्षार्थी एवं पाठ्यक्रम आते हैं।

डॉक्टर राधाकृष्णन के अनुसार- ” शिक्षा को मनुष्य और संपूर्ण समाज का निर्माण करना चाहिए। इस कार्य को किए बिना शिक्षा अनुवीक और अपूर्ण है।”

शिक्षण का व्यापक अर्थ (Wider Meaning Of Teaching)

शिक्षण के व्यापक अर्थ में वह सब सम्मिलित किया जाता है जो मनुष्य अपने संपूर्ण जीवन में सीखता है। मनुष्य अपनी प्रवृत्ति के अनुसार कुछ ना कुछ सीखता ही रहता है। सिखाने का काम व्यक्ति या वस्तु द्वारा किया जाता है। सबसे पहले समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार से सीखता है। फिर विद्यालय, समाज द्वारा और टेलीविजन, नाटक आदि के माध्यम से भी सीखता है।

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आता उपरोक्त के आधार पर कहा जा सकता है कि शिक्षण का व्यापक अर्थ वह है जिसमें मनुष्य औपचारिक (Formal) अनौपचारिक (Informal) एवं निरौपचारिक (Non Formal) साधनों के माध्यम से सीखता है।

शिक्षण के प्रकार

शिक्षण के प्रकार निम्लिखित है-

1- एकतंत्रात्मक शिक्षण

एकतंत्रात्मक शिक्षण में शिक्षक का स्थान शिक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत प्रधान माना जाता हैं और छात्र का स्थान गौण होता है।

2- लोकतंत्रात्मक या जनतंत्र शिक्षण

यह शिक्षण प्रणाली मानवीय सम्बन्धों पर आधारित होती है। इस शिक्षण में शिक्षक एवम छात्र एक दूसरे को प्रभावित करने का प्रयत्न करते है

3- हस्तक्षेप रहित शिक्षण

इस प्रकार का शिक्षण करते समय शिक्षक छात्र के साथ मित्रवत व्यवहार करता है।

शिक्षण की परिभाषाएं || Definitions Of Teaching in Hindi

रायबर्न के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

” रायबर्न महोदय ने शिक्षण को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि शिक्षण के तीन बिंदु हैं शिक्षक, शिक्षार्थी एवं पाठ्यवस्तु। इन तीनों के बीच संबंध स्थापित करना ही शिक्षण है। यह सम्बंध बालक की शक्तियों के विकास में सहायता प्रदान करता है।”

थॉमस एम रिस्क के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

“सीखने के लिए दिए जाने वाले निर्देशन के रूप में शिक्षण को परिभाषित किया जा सकता है।”

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ह्यूजेज तथा ह्यूजेज के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

” शिक्षण का अर्थ है सीखने में सहायता करना। तब तक कुछ नहीं दिया गया जब तक वह ग्रहण नही किया गया, तब तक कुछ नहीं पढ़ाया गया जब तक वह सीखा नही गया।”

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एन• एल• गेज के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

गेज ने शिक्षण को परिभाषित करते हुए लिखा है-

“शिक्षण पारस्परिक प्रभावों का वह रूप है जिसका उद्देश्य दूसरे व्यक्ति के व्यवहार, क्षमताओं में परिवर्तन लाना है।”

बी• एफ• स्किनर के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

स्किनर ने शिक्षण का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखा है-

“शिक्षण पुनर्बलन की आकस्मिकताओं का क्रम है।”

योकम एवं सिंपसन के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

शिक्षण का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है , जिसके द्वारा समूह के लोग अपने अपरिपक्व सदस्यों को जीवन के साथ सामंजस्य स्थापित करना सिखाते हैं।

बर्टन के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

“शिक्षण सीखने के लिए दी जाने वाली प्रेरणा निर्देशन व प्रोत्साहन है।”

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बी ओ स्मिथ के अनुसार शिक्षण की परिभाषा

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“शिक्षण एक उद्देश्य निर्देशित क्रिया है।”

अच्छे शिक्षण की विशेषताएं

◆ शिक्षण सुनियोजित होना चाहिए।

◆ शिक्षण सुझावात्मक होना चाहिए।

◆ शिक्षण दया एवं सहानुभूति पूर्ण होना चाहिए।

◆ अच्छा शिक्षण प्रेरणादायक होता है।

◆ अच्छे शिक्षण में व्यक्तिगत विभिन्नताओं को ध्यान में रखा जाता है।

◆ शिक्षण प्रजातांत्रिक होना चाहिए।

◆ शिक्षण प्रगतिशील होना चाहिए।

◆ शिक्षण निर्देशात्मक होना चाहिए।

◆ शिक्षण निदानात्मक व उपचारात्मक होना चाहिए।

शिक्षण के उद्देश्य व महत्व

  • शिक्षण बालक के व्यवहार में परिवर्तन करने की प्रक्रिया है।
  • शिक्षण एक उद्देश्य पूर्ण प्रक्रिया है।
  • शिक्षण सामाजिक प्रक्रिया है अर्थात इससे समाज का विकास होता है।
  • शिक्षण व्यवसायिक प्रक्रिया है जिससे व्यवसाय करने में काफी सहायता मिलती है।
  • यह तार्किक प्रक्रिया भी है जिससे तर्क करने का गुण भी विकसित होता है।

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