अटल जी की प्रसिद्ध कविताएं | Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi

Atal Bihari Vajpayee poems in Hindi | Atal Bihari Vajpayee ki Kavita | भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रसिद्ध कविताएं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल जी भी पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन स्वर्गीय APJ Abdul kalam जी की तरह बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। अपने भाषण में ख़ुद की लिखी Poems use करके Atal Bihari Vajpayee लोगों को आश्चर्य में डाल देते थे। उनकी कविताओं में उनकी feelings दिखती थी। Atal Bihari Vajpayee जी ने poems के जरिये बताया कि प्रधानमंत्री में भी feelings होती है। नेताओं में भी feelings होती है। हर नेता बुरा नही होता जैसी बात के साक्षात उदाहरण थे हमारे अटल जी।

Ex PM Late Atal bihari Vajpayee जी ने यूँ तो बहुत सी कविताएं (Poems) लिखी हैं, पर उनके द्वारा लिखी उनकी टॉप 5 poems आप इस आर्टिकल में पढ़ने को मिलेंगी।

Atal bihari vajpayee poems in hindi
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Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi | अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएं

Atal bihari vajpayee poems पढ़ते समय एकदम डूबते हुए पढ़ते है,उनको सुनने वाला भी ख़ुश हो जाता था। यूँ कहूँ तो atal bihari vajpayee poem सुनाते वक़्त उन्हें अपनी कविता से कनेक्ट करा लेते थे। ये उनकी सच्चा कवि होने की प्रतिभा ही थी जो आज भी लोग atal bihari vajpayee poems के दीवाने हैं। कोई atal bihari vajpayee poems in hindi चाहता है तो कोई अटल बिहारी बाजपेयी की कविताएं पढ़ने को ललायित रहता है।

Atal bihari vajpayee poems in Hindi [Best 5] | Atal Bihari vajpayee ki kavita | Atal ji ki kavitayen

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Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi | Atal ji ki kavitayen | Atal ji ki kavita 1 –

कदम मिलाकर चलना होगा

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा। 

हास्य-रूदन में, तूफानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
पीड़ाओं में पलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा। 

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा। 

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

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Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi | Atal Bihari Vajpayee ki Kavita | Atal ji ki kavitayen 2 –

खून क्यों सफेद हो गया?

खून क्यों सफेद हो गया?
भेद में अभेद खो गया.
बंट गये शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार दड़ गई।
दूध में दरार पड़ गई।

खेतों में बारूदी गंध,
टूट गये नानक के छंद
सतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है.
वसंत से बहार झड़ गई
दूध में दरार पड़ गई।

Atal bihari vajpayee poems in hindi
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अपनी ही छाया से बैर,
गले लगने लगे हैं ग़ैर,
ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता।
बात बनाएं, बिगड़ गई।
दूध में दरार पड़ गई।

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Atal ji Poems in Hindi | Atal Bihari Vajpayee ki Kavita | Atal ji ki kavitayen 3 –

हरी-हरी दूब पर

हरी हरी दूब पर 
ओस की बूंदे 
अभी थी, 
अभी नहीं हैं| 
ऐसी खुशियां 
जो हमेशा हमारा साथ दें 
कभी नहीं थी, 
कहीं नहीं हैं| 

क्‍कांयर की कोख से 
फूटा बाल सूर्य, 
जब पूरब की गोद में 
पाँव फैलाने लगा, 
तो मेरी बगीची का 
पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा, 
मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूं 
या उसके ताप से भाप बनी, 
ओस की बूंदों को ढूंढूं? 

सूर्य एक सत्य है 
जिसे झुठलाया नहीं जा सकता 
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है 
यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है 
क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊं? 
कण-कण में बिखरे सौन्दर्य को पिऊं? 

सूर्य तो फिर भी उगेगा, 
धूप तो फिर भी खिलेगी, 
लेकिन मेरी बगीची की 
हरी-हरी दूब पर, 
ओस की बूंद 
हर मौसम में नहीं मिलेगी।

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Atal ji Poems in Hindi | Atal Bihari Vajpayee ki Kavita | Atal ji ki kavitayen 4 –

रंक को तो रोना है

कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है|
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है|
धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है|
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है|
बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है।

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Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi | Atal Bihari Vajpayee ki Kavita | Atal ji ki kavitayen 5 –

ठन गई! मौत से ठन गई! 

ठन गई! 
मौत से ठन गई! 

जूझने का मेरा इरादा न था, 
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, 

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, 
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। 

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, 
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। 

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, 
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं? 

तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ, 
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा। 

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र, 
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, 
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। 

प्यार इतना परायों से मुझको मिला, 
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला। 

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये, 
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। 

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, 
नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है। 

पार पाने का क़ायम मगर हौसला, 
देख तेवर तूफां का, तेवरी तन गई। 

मौत से ठन गई!

Final words-

दोस्तों तो ये थीं अटल जी की कुछ प्रसिद्ध कविताएं… आपको कैसी लगीं…कमेंट की माध्यम से हमे अवगत कराएं।

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