1 of the Best Notes स्मृति का अर्थ एवं परिभाषा, स्मृति के प्रकार, स्मृति के अंग, विशेषताएँ

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स्मृति का अर्थ एवं परिभाषा- दोस्तों आज हम आपको स्मृति से जुड़ी समस्त जानकारी देंगे। सबसे पहले स्मृति का अर्थ जानेंगे फिर स्मृति की परिभाषा भी जानेंगे।

स्मृति का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Memory in Hindi)

स्मृति का अर्थ (Meaning of Memory)

स्मृति एक सामान्य पद है, जिसमे भूतकाल के अनुभव एकत्रित रहते हैं।

जनसाधारण के मोबाइल (Mobile ) में पड़ने वाले मेमोरी कार्ड (Memory Card ) से स्मृति का अर्थ और स्पष्ट हो जाता है । मेमोरी कार्ड में बहुत सी Audio & Vedio Clips को संग्रहित किया जाता है । मेमोरी कार्ड की अपनी निर्धारित संग्रहण क्षमता होती है । मेमोरी कार्ड की क्षमता पूर्ण हो जाने पर नई सामग्री संग्रहित करने के लिए पुरानी सामग्री का विलोपन करना अनिवार्य होता है ।

इसी प्रकार मानव स्मृति की भी व्याख्या की जा सकती है ।

मानव स्मृति की भी क्षमता सीमित होती है और इसके दो पक्ष होते है – 1- सकारात्मक पक्ष , जिसे हम स्मृति या स्मरण कहते हैं। तथा 2-नकारात्मक पक्ष , जिसे हम विस्मरण कहते हैं ।

स्मरण से तात्पर्य – स्मृति में संग्रहित किसी विषयवस्तु को याद करने से है , जबकि विस्मरण से तात्पर्य संग्रहित विषयवस्तु को याद करने की असमर्थता से है । स्मृति एक मानसिक क्रिया है

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स्मृति की परिभाषा (Definition of Memory)

स्मृति की परिभाषा- स्मृति का अर्थ विभिन्न मनोवैज्ञानिकों की परिभाषाओं से और अधिक स्पष्ट हो जाता है।

वुडवर्थ के शब्दों में स्मृति की परिभाषा –

पहले सीखी जा चुकी बात का स्मरण करना ही स्मृति है ।

Memory consists in remembering what has previously been learned . – Woodworth

स्टाउट के शब्दों में स्मृति की परिभाषा-

स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है ।

Memory is the ideal revival . – Stout .

रायबर्न के शब्दों में स्मृति की परिभाषा –

अपने अनुभवों को संचित रखने और उनको त करने के कुछ समय बाद चेतना के क्षेत्र में लाने की जो शक्ति हमें होती है , को स्मृति कहते हैं ।

The power that we have to store our experiences and to bring 5 into the field of consciousness some time after the experiences have arred , it termed memory . – Ryburn

स्मृति के अंग (Factors of Memory)

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स्मृति के अंग

स्मति एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है । बुडवर्थ ( Woodworth ) के अनुसार स्मृति प्रक्रिया के निम्नांकित चार अंग या पद होते हैं

  1. सीखना या अधिगम ( Learning)
  2. धारण ( Retention )
  3. पुनःस्मरण ( Recall )
  4. पहचान ( Recognition )
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1- सीखना या अधिगम (Learning) :

स्मृति का पहला अंग है – सीखना । हम जिस बात को याद रखना चाहते हैं , हम उसे सर्वप्रथम सीखना पड़ता है ।

2- धारण (Retention ) :

स्मृति का दूसरा अंग है – धारण । धारण का तात्पर्य है – सीखी हुई बात को मस्तिष्क में संचित रखना ।

3- पुनःस्मरण (Recall ) :

स्मृति का तीसरा अंग है – पुनःस्मरण । पुनःस्मरण का तात्पर्य है – सीखी हुई बात को अचेतन मन से चेतन मन में लाना ।

4- पहचान (Recognition ) :

स्मृति का चौथा अंग है – पहचान । पहचान का तात्पर्य है – वर्तमान काल में उस बात से परिचित होना जिससे कि अतीत काल में परिचित हो चुके हैं ।

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अच्छी स्मृति की विशेषताएं (Characteristics of Good Memory)

व्यक्ति की सफलता का मुख्य आधार- अच्छी स्मृति होना है। स्टाउट ने अच्छी स्मृति के निम्नलिखित लक्षण बताए हैं-

  1. शीघ्र सीखना या अधिगम
  2. उत्तम धारण शक्ति
  3. शीघ्र पुनःस्मरण
  4. शीघ्र एवं स्पष्ट पहचान
  5. अनावश्यक बातों का विस्मरण
  6. उपादेयता

स्मृति के प्रकार (Types of Memory)

स्मृति के प्रकार निम्न हैं:

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स्मृति के प्रकार
  1. तात्कालिक स्मृति
  2. स्थायी स्मृति
  3. व्यक्तिगत स्मृति
  4. अव्यक्तिगत स्मृति
  5. सक्रिय स्मृति
  6. निष्क्रिय स्मृति
  7. यांत्रिक स्मृति
  8. तार्किक स्मृति
  9. आदत स्मृति
  10. इन्द्रिय अनुभव स्मृति
  11. शारिरिक स्मृति
  12. वास्तविक स्मृति
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स्मरण की प्रक्रिया (Process of remembering)

स्मरण की प्रक्रिया समझने के लिए यह चित्र देखिये:

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स्मरण की प्रक्रिया

मन के 3 स्तर होते हैं- चेतन, अर्द्धचतन व अचेतन। जब मनुष्य बाह्य वातावरण से ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से कोई ज्ञान प्राप्त करता है। तो सबसे पहले चेतन मन मे एकत्रित होता है। समय के साथ साथ अर्द्धचेतन मन मे चला जाता है।

विशेष नोट- स्मृति का स्वरूप पुनरुत्पादक होता है। इस विचारधारा के समर्थक एबिंगहास हैं। जबकि दूूूसरी विचारधारा स्मृति का स्वरूप रचनात्मक होता है इसके समर्थक बार्टलेट हैं।

स्मृति के नियम (Rules of memory)

बी एन झा ने स्मृति के तीन नियम बताएं है। जो कि इस प्रकार हैं-

1-आदत का नियम

इस नियम के अनुसार जब हम किसी विचार को बार-बार दोहराते हैं। तब हमारे मस्तिष्क में उसकी छाप इतनी गहरी हो जाती है कि हम में बिना विचारे उसको व्यक्त करने की आदत पड़ जाती है।

उदाहरण – बहुत से लोगों को आधे दो , तीन , चार ,पांच आदि के पहाड़े रटे होते हैं।इनको बोलते समय उनको अपने विचार शक्ति का प्रयोग नहीं करना पड़ता है।

2-निरंतरता का नियम

इस नियम के अनुसार सीखने की प्रक्रिया में जो अनुभव विशेष रूप से प्रकट होते हैं। वे हमारे मस्तिष्क में कुछ समय तक निरंतर आते रहते हैं। अतः हमें उन को स्मरण रखने के लिए किसी प्रकार का प्रयोग नहीं करना पड़ता हैं।

3-परस्पर संबंध का नियम

इस नियम को साहचर्य का नियम भी कहते हैं।इस नियम के अनुसार जब हम एक अनुभव को दूसरे अंगों से संबंधित कर देते हैं। तब उनमें से किसी एक का स्मरण होने पर हमें दूसरे का स्वयं ही स्मरण हो जाता है।

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स्मरण करने की विधियां (Methods of Remembering)

स्मरण करने या स्मृति की प्रमुख विधियाँ इस प्रकार हैं-

  1. पूर्ण विधि
  2. खंड विधि
  3. मिश्रित विधि
  4. प्रगतिशील विधि
  5. अंतर युक्त विधि
  6. अंतहीन विधि
  7. सक्रिय विधि
  8. निष्क्रिय विधि
  9. रटने की विधि
  10. निरीक्षण विधि
  11. क्रिया विधि
  12. विचार साहचर्य विधि
  13. साभिप्राय विधि
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स्मृति प्रशिक्षण (Memory Training)

स्मृति की उन्नति के लिए प्रशिक्षण या अभ्यास करना अति आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय या नियम है। जिसकी वजह से इस स्मृति की उन्नति में सहायता प्राप्त होती है।जो अग्रलिखित हैं ।

  1. दृढ़ निश्चय
  2. स्पष्ट ज्ञान
  3. प्रोत्साहन
  4. पहले से समझना
  5. रुचि उत्पन्न करना
  6. पूर्व ज्ञान पर आधारित
  7. स्मरण के अधिक अवसर
  8. दोहराना
  9. संवेगात्मक स्थिरता
  10. एकाग्रता

स्मरण या स्मृति का शैक्षिक महत्व

शिक्षा की प्रमुख प्रक्रिया में अधिगम (सीखना) के लिए स्मरण क्रिया और इसकी विधियों का शैक्षिक महत्व ये है कि इनके द्वारा शिक्षार्थी को स्मरण करने के सरल ढंग का ज्ञान हो जाता है और किसी विषय को स्मरण करने में समय और श्रम की बचत होती है।

तो दोस्तों हमने सीखा – स्मृति का अर्थ एवं परिभाषा, स्मृति के प्रकार, स्मृति के अंग, स्मृति की विशेषताएं, स्मृति प्रशिक्षण, स्मरण या स्मृति का शैक्षिक महत्व, स्मरण करने की विधियां।उम्मीद है आपको अच्छा लगा होगा।

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