दशहरा से जुड़ी कहानियां(dussehra se judi kahaniya)

कहानियां

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दशहरा से जुड़ी कहानियां(dussehra se judi kahaniya): किसी भी त्योहार को मनाने के पीछे उसके बहुत सारे कारण होते है। दशहरा भी एक ऐसा पर्व है। जिससे जुड़ी हुई बहुत सारी कहानियां है। आज HMJ आपको दशहरा से जुड़ी हुई कहानियों से अवगत कराएंगे।जिसमे राम और रावण की दशहरा की कहानी, पांडव और कौरव की कहानी, दुर्गा माता और महिषासुर की दशहरा की कहानी आदि के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।

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दशहरा से जुड़ी कहानियां

दशहरा से जुड़ी कहानियां(dussehra se judi kahaniya)

राम और रावण की दशहरा की कहानी

यह घटना हम सभी के बीच मे काफी प्रचलित है। और सभी लोग इसके बारे में जानते है। राम, लक्ष्मण और सीता जब वनवास के लिए जाते है। तो वहां पर रावण अपनी बहन का बदला लेने के लिए माता सीता उठा कर लंका चला जाता है।
उसके पश्चात श्री राम अपनी वनार सेना के साथ लंका में आक्रमण करते है।

और वहां पर रावण ,उसके भाई और उसके बेटे का वध किया। तभी से लोग यह मानते है कि सत्य की असत्य पर जीत हुई। धर्म की अधर्म पर जीत हुई। और उसकी खुशी मनाने के लिए लोग दशहरा त्योहार को मानते है।

कौरव और पांडव की दशहरा कहानी

महाभारत में पांडवों और कौरवों के बीच जुए का खेल चल रहा है। मामा शकुनि की कपट चाल से पांडव अपना सब कुछ हार जाते है। जिसके पश्चात उन्हें एक 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञात वास दिया जाता है। वह वनवास में जाते वक्त रास्ते मे शमी के वृक्ष के नीचे अपने शस्त्रों को छिपा देते है।

और राजा विराट के यहां रहते है। जब राजा विराट के राज्य में कौरवों के द्वारा आक्रमण कर दिया जाता है। तब पांडव अपबे शस्त्र निकलते हैं। और विराट नरेश के साम्राज्य की रक्षा करते है।

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माता दुर्गा और महिषासुर की दशहरा कहानी

ऐसा कहा जाता है कि उस समय महिषासुर का बहुत तांडव चल रहा था। सभी देवता इस बार से परेशान थे क्योंकि उनका अस्तित्व खतरे में था। इस प्रकार से सभी देवताओं ने विचार विमर्श किया। और उन्होंने उसके पश्चात आपसी शक्तियों को मिला कर एक नई शक्ति का सृजन किया। जिसे लोग दुनिया मे दुर्गा के नाम से जानते है।

इनके दस हाथ थे और और सभी अपने आप मे अलग विशेषताए रखते थे। दसो हाथ मे अलग अलग शस्त्र थे। उसके पश्चात यह माना जाता है है कि महिषासुर और दुर्गा माता के मध्य 9 दिन और रात युद्ध हुआ और दसवे दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का और त्रिशूल से वध कर दिया है। इसीलिये इस दसवे दिन को हम दशहरे के नाम से जानते है।

कुल्लू के राजा से जुड़ी दशहरा कहानी

यह घटना कुल्लू की है। जहां पे राजा जगत सिंह रहा करते थे। उन्हें एक जानकारी मिली कि उनके एक राज्य के ब्राह्मण के पास काफी सोना है। राजा को लालच आया और वह उसे हड़पना चाहते थे। उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि आप लोग उस सोना को लेकर आइये। राजा के सैनिक उस ब्राह्मण को परेशान करते थे। जिस से एक दिन परेशान आकर ब्राह्मण परिवार ने आत्महत्या कर ली।

परन्तु आत्महत्या करने से पहले उसने राजा जी को श्राप दे दिया। जिस से राजा जी का स्वाथ्यय बिगड़ने लगता है। इसके बाद एक साधु सलाह देता है कि अपने राज्य में रघुनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कीजिये। राजा अयोध्या से रघुनाथ जी की प्रतिमा को लेकर स्थापित करता है। उसके बाद उसका स्वाथ्यय सही रहने लगता है। और राजा अपना पूरा जीवन व राज्य रघुनाथ जी को समर्पित कर देता है। तभी से यह दशहरा पर्व मनाया जाता है।

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