अनुवांशिकता और वातावरण का प्रभाव

अनुवांशिकता और वातावरण का प्रभाव (Influence of Heredity and Environment) बालक के विकास पर पड़ता है। अनुवांशिकता को ही वंशानुक्रम भी कहते हैं।आइये जानते हैं क्या है ये अनुवांशिकता और वातावरण का प्रभाव या वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव।

अनुवांशिकता/ वंशानुक्रम-

ये मानव के व्यक्तित्व के विकास को आधार प्रदान करता है। मनुष्य को पैदा होते ही जो पैतृक गुण मिलते हैं यही अनुवांशिकता है।

वातावरण-

जो जीन्स/अनुवांशिकता नही है वो सब वातावरण है। हमारे आसपास जो घेरे है वो भौतिक वातावरण है। पर इसके अलावा अन्य पहलू भी वातावरण में आते हैं जैसे समाज, नैतिकता, राजनीति, संस्कृति इत्यादि।

वुडवर्थ ने कहा है कि “वातवरण और अनुवांशिकता दोनों समान रूप से ज़रूरी है वृद्धि और विकास के लिये।”

वुडवर्थ ने ही बताया कि अनुवांशिकता और वातावरण का गुणनफल ही विकास है।

विकास= आनुवंशिकता × वातावरण

अथवा अंग्रेजी में

Development= Heredity × Environment (D= H×E)

अर्थात किसी एक कि अनुपस्थिति हुई तो विकास असम्भव है।

इस टॉपिक से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न ( Some Important Question Related to this topic)

1- विकास गुणनफल है-

क- केवल अनुवांशिकता का
ख- केवल वातावरण का
ग- दोनों का
घ- उपरोक्त में से कोई नही

2- मनुष्य में गुणसूत्रों की संख्या है-

1-56
2-46
3-60
4-23

Final words-

दोस्तों यदि आपने ये टॉपिक पढ़ा और आपको ये प्रश्न आ रहे हैं तो कमेंट करके उत्तर दीजिये। अन्यथा बताइये की आपको उत्तर जानना है। हम आपको बताएंगे।

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>> विकास की दिशा का सिद्धांत

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